Sahityasudha

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वर्ष: 3, अंक 62, जून(प्रथम), 2019

लेखक या सम्पादक की लिखित अनुमति के बिना पूर्ण या आंशिक रचनाओं का पुनर्प्रकाशन वर्जित है। लेखक के विचारों के साथ सम्पादक का सहमत या असहमत होना आवश्यक नहीं। सर्वाधिकार सुरक्षित। साहित्यसुधा में प्रकाशित रचनाओं में विचार लेखक के अपने हैं और साहित्यसुधा टीम का उनसे सहमत होना अनिवार्य नहीं है। साहित्यसुधा एक सम्पूर्णतः साहित्यिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य सभी रचनाकारों को प्रोत्साहित करके हिंदी को बढ़ावा देना है | इसके माध्यम से हिंदी साहित्य की सभी विधाओं को सम्मिलित करने का प्रयास किया जाएगा।

साहित्यसुधा

सम्पादकीय मंडल:-

सम्पादक - डॉ०अनिल चड्डा 

सह-सम्पादक - अखिल भंडारी  Akhil Bhandari

साहित्यिक समाचार



जवाहर बाल भवन में "आरंभ फाउंडेशन " द्वारा "आओ, सुनें-गुनें कहानी " कार्यक्रम का आयोजन

जवाहर बाल भवन , भोपाल के रचनात्मक लेखन विभाग के तत्वाधान में "आरंभ फाउंडेशन " द्वारा आज दिनांक 14/05/19 को "आओ, सुनें-गुनें कहानी " कार्यक्रम का आयोजन हुआ । इस अभिनव प्रयोग में प्रमुख बाल साहित्यकारों और बालक -बालिकाओं ने भाग लिया और अपनी अपनी बाल कहानियां सुनाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया ,साथ ही कहानियों से अच्छी शिक्षाएं भी पाईं।.....

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डॉ गुलाब चंद पटेल को सम्मान पत्र

मुन्शी प्रेमचंद अलंकार से मधु शाला साहित्य परिवार उदयपुर द्वारा आयोजित प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए हिंदी गुजराती कवि लेखक अनुवादक, नशा मुक्ति अभियान प्रणेता, और ब्रेसट कैंसर अवेर्नेस प्रोग्राम आयोजित करने वाले भूत पूर्व ऑफिस सुपरिटेंडेंट......

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राष्ट्रीय ख्याति के अम्बिका प्रसाद दिव्य स्मृति प्रतिष्ठा पुरस्कार घोषित

भोपाल। विगत इक्कीस वर्षों से प्रदान किये जाने वाले राष्ट्रीय ख्याति के अम्बिका प्रसाद दिव्य स्मृति प्रतिष्ठा पुरस्कारों की घोषणा 31 मार्च 2019 को साहित्य सदन 145 ए साईंनाथ नगर , सी सेक्टर , कोलार रोड , भोपाल के पुरस्कार संयोजक श्री जगदीश किंजल्क ने की । देश के कोने – कोने से दो सौ आठ पुस्तकें प्राप्त हुई थीं ।......

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मातृ दिवस पर गीतशाला में ऑनलाईन कार्यक्रम का ऐतिहासिक भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ

न्यूज ब्यूरो :: संवाददाता के अनुसार साहित्य संगम संस्थान के गीतशाला पटल पर संयोजिका श्रीमती सरोज ठाकुर ( बिलासपुर छत्तीस गढ़) नें लगातार ४८ घंटे का मातृ दिवस पर भव्य ऑन लाईन काव्य सम्मेलन का आयोजन रख संस्थान के आन लाईन कार्यक्रमों में इतिहास रच दिया ,जिसमें देश विदेश के बहुत से प्रसिद्ध कवि कवियत्रियों की उपस्थिति ,और अपनी अपनी.....

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डॉ सुलक्षणा ने शिक्षा मंत्री को भेंट किया अपना हरियाणवी संग्रह



रोहतक (न्यूज़)। गाँव अजायब निवासी अंग्रेजी प्राध्यापिका एवं कवयित्री डॉ सुलक्षणा अहलावत ने अपने पहले हरियाणवी काव्य संग्रह "मन का के ठिकाणा" की प्रति शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा को भेंट की। डॉ सुलक्षणा ने शिक्षा मंत्री जी के साथ साथ अपने काव्य संग्रह की प्रति.....

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संपादक की ओर से

“आज के दोहे ”
      
आज भावना देश में, बिके कौड़ियों मोल,
द्वेष मिले हर वेष में, चाहे जितना तोल !

मर जाएगा खोज के, अपना नाहीं कोय,
पेट भरन को आफ्ना, नोंचेगे सब तोय  !

सुन ले प्यासे की कुआँ, ऐसी नाही रीत,
पानी का भी मोल है, सीख सके तो सीख !

चौराहे पर मैं खड़ा, सोचूँ कित को जाऊँ,
पकड़ूँ जिसका हाथ भी, असत ही मैं पाऊँ !

जीने की क्या बात है, चाहे जिस तरह जी, 
विष पर भ्रष्टाचार का, अमृत मान और पी ! 
     - डॉ० अनिल चड्डा

अब तक

आपके पत्र



सर,

मैंने आपकी कविता भिज्ञ - अनभिज्ञ पढ़ी।
वह काफी प्रेरणादायक और करुणामई कविता है।
उससे मुझे काफी कुछ सीखने को मिला है।

धन्यवाद।

Apurva Kushwaha
punita.appu@gmail.com

सादर नमन आदरणीय

प्रकाशित हर रचना बेहद उम्दा है
सभी कलम ढेरों बधाईयया

आपकी यह। बेब पत्रिका साहित्यकारो के लिए उम्दा मंच है

Yogi Nishad [yoginishad.yn@gmail.com]

अनिल जी सादर प्रणाम

साहित्यसुधा जिन ऊँचाईयों को छू रही है इसके लिए आपको एवं संपादक टीम को बहुत बहुत बधाई ।अप्रैल द्वितीय अंक प्राप्त हुआ सभी रचनाकारों की अतिसुन्दर रचनाएं उन्हे बधाई |

लेकिन आपकी कविता जिंदगी ने ठग लिया ,डॉ कनिका वर्मा जी की कविता दो परिंदे बहुत अच्छी लगी एवं मनसाराम बैरवाल जी कविता झोंपङी की आग तो भाव विभोर कर देने वाली कविता है यदि इन्हे भावों के बादशाह की संज्ञा दी जाए तो शायद कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी |

लेखक व पाठक

रामदयाल रोहज
खेदासरी (राजस्थान)
ramdayalrohaj.rd@gmail.com

आदरणीय सम्पादक अनिल चड्डा जी

सादर प्रणाम ।

xxxxx आपकी पत्रिका सच में तारीफे काबिल है।

महोदय जी साहित्य सुधा का अप्रैल का प्रथम अंक को पढ़ा उसमे आपकी जो रचना है टूटना नहीं आदमी की जिंदगी के लिए एक दम सार्थक हैं । यदि दुनियां में हम आए हैं तो हमें तो चलना ही पडे़गा चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन रहें जो जिंदगी हर मसलों को एक घूंट दवा समझ कर पी जाए वही षोहरत की बुलंदी पर पहुंच सकता है। न हम किसी से डरें न हम किसी के आगे झुकें महोदय जी 14 लाईन की इस कविता में आपने जिंदगी की हर वो पहलु को लपेट दिए हैं जो हर इंसान के जिंदगी की आवष्यकता है। अपकी रचना अच्छी लगी । इस रचना से उन लोगों को जरूर लाभ होगा जो किसी काम को करने से पहले सोचते रहते हैं करें या न करें ।



आपका रचनाकार व पाठक
जयशंकर प्रसाद
jsp.tnr@gmail.com

इस अंक में

गीत, गज़ल, इत्यादि

आलेख, कहानियाँ, व्यंग्य, इत्यादि

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