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वर्ष: 3, अंक 45, सितम्बर(द्वितीय) , 2018



गमों से निभा लो यारो


डॉ० अनिल चड्डा


 
जब तक चले जिंदगी, चला लो यारो,
खुशी न मिले तो गमों से निभा लो यारो।

किस राह पर था चलना, किस राह पर हैं पहुँचे,
मिले जो भी राह तुमको, अपना बना लो यारो।

जज्बात की नहीं कीमत, न कीमत है तेरी चाह की,
जो कीमत मिले जहाँ में, उसको ही पा लो यारो।

बस प्यार खुद से करना, दुनिया में ये चलन है,
कुछ भी मिले न चाहे, सब कुछ लुटा दो यारो।

कोई अंत तो नहीं है, गर राह छिटक भी जाये,
हर राह का मुसाफिर, खुद को बना लो यारो।
	 

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