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वर्ष: 3, अंक 45, सितम्बर(द्वितीय) , 2018



आधुनिक भारत के निर्माता:-भारत रत्न एम. विश्वेश्वरैया
संदर्भ:- 15 सितम्बर( अभियन्ता दिवस)


राजेश कुमार शर्मा"पुरोहित"


भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया एक प्रख्यात इंजीनियर व राजनेता थे।इनका जन्म 15 सितम्बर 1860 को चिक्काबल्लापुर कोलार कर्नाटक में हुआ था। उन्होनें आधुनिक भारत निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी।1955 में उन्हें भारत रत्न से अलंकृत किया था। भारत मे उनका जन्म दिन अभियन्ता दिवस के रूप में प्रतिवर्ष मनाया जाता है। ब्रिटिश सरकार ने उन्हें नाइट कमांडर ऑफ दी ब्रिटिश इंडियन अम्पायर की उपाधि से सम्मानित किया था। वे हैदराबाद शहर के बाढ़ सुरक्षा प्रणाली के मुख्य डिजायनर थे। उन्होंने मैसूर के कृष्ण सागर बाँध के निर्माण में मुख्य अभियन्ता के रूप में कार्य भी किया था।

ब्राह्मण कुल में जन्में विश्वेश्वरैया के पिता श्री निवास शास्त्री व माता का नाम वेंकाचम्मा था। उनके पिता संस्कृत भाषा के बड़े विद्वान थे। एक बड़े आयुर्वेद चिकिसक थे। 12 वर्ष की उम्र में इनके पिताजी की मृत्यु हो गई थी। उनकी प्रारम्भिक शिक्षा उनके पैतृक गाँव मे हुई। बाद में उन्होंने बेंगलोर कॉलेज में पढ़ाई की। धन के अभाव में ट्यूशन भी की। 1881 में बी.ए. प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की।मैसूर सरकार की मदद से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की पूना के साइंस कॉलेज से की।

1883 में इन्होंने एल सी ई व एफ सी ई परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया।इनकी योग्यता को देखकर महाराष्ट्र सरकार ने इन्हें नासिक में इन्हें सहायक इंजीनियर के पद पर नियुक्त किया।

इन्होंने पी डब्ल्यू डी में नौकरी की। उन्होंने डेक्कन में सिंचाई व्यवस्था को कार्यान्वित किया। संसाधनों और उच्च तकनीक के अभाव में भी उन्होंने कई परियोजनाओं को सफल बनाया। इनमें कृष्ण राज सागर बांध भद्रावती आयरन एन्ड स्टील वर्क्स मैसूर संदल आयल एन्ड सोप फेक्ट्री मैसूर विश्वविद्यालय और बैंक ऑफ मैसूर । ये उपलब्धियां एम वी के कठिन प्रयास से सार्थक हुई। 32 वर्ष की उम्र में इनकी जल आपूर्ति योजना से सभी प्रभावित हुए। स्टील के दरवाजे बांध में लगाने के लिए सर्वप्रथम इन्होंने ही बनवाये थे जो आज भी प्रचलित हैं। ब्रिटिश सरकार ने इन्हें सिचाई व्यवस्था में लगाया था।1909 को इनको मैसूर का मुख्य अभियंता नियुक्त किया गया।मैसूर राज्य में अशिक्षा गरीबी बेरोजगारी बीमारी को लेकर विश्वेश्वरैया बहुत चिंतित रहते थे। इन समस्याओं से निजात पाने के लिए इन्होंने इकोनॉमिक कॉन्फ्रेंस के गठन का सुझाव दिया। मैसूर राज्य में इनके योगदान को देखकर 1912 में इन्हें राज्य का दीवान यानी मुख्यमंत्री नियुक्त कर दिया। दीवान बनने के बाद इन्होंने शैक्षिक व औधोगिक क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया।1918 में दीवान पद से सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत होने के बाद भी वे निरन्तर काम मे लगे रहे। 1906 में इन्हें केसर हिन्द से सम्मानित किया। देश के लिए उत्कृष्ट कार्यो को देखते हुए सत्कार ने इन्हें 1955 में भारत का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया। भारत सरकार ने इनकी आयु के 100 वर्ष पूर्ण होने पर इनके सम्मान में एक डाक टिकिट भी जारी किया था।

दबंग व्यक्तित्व के धनी सच्चे देशसेवक आधुनिक भारत के निर्माता के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। महान कार्यों व जीवन आदर्शों के लिए वे हमेशा हम सबकी स्मृति पटल पर रहेंगे।

एक अभियन्ता, राजनेता व। कुशल प्रशासक के रूप में उनकी पहचान थी। रेकॉन्स्ट्रुक्टिंग इंडिया व प्लांड इकॉनमी फ़ॉर इंडिया उनकी प्रसिद्ध कृतियाँ थी। वे प्रत्येक कार्य को बड़ी लग्न से करते थे। संयमित जीवन व कर्मनिष्ठ रहकर उन्होंने शिक्षा व समाज सेवा के लिए महत्वपूर्ण काम किया। उन्हें पुरस्कार में जो राशि मिलती थी उसे देश के कल्याण हेतु चल रही योजनाओं हेतु दे दिया करते थे।


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