Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 45, सितम्बर(द्वितीय) , 2018



अंतस


सुशील शर्मा


                           	 	 
जीवन नि:संग समर्पण 
क्षण-क्षण जो मरता,प्रण 

बोध भव्य निर्व्यास जीवन 
अकुलाहट,असमंजस,मन 

आर्त,अनुभव सर्व विज्ञ 
विदग्ध, सिसकता प्रेम यज्ञ

अँजुरी भर चांदनी 
ठिठक खड़ी संगनी। 

अस्मिता विलय हुई 
अनागत स्पन्दित प्रलय हुई। 

क्यों ये रात बिहानी
अंतस लालसा अकुलानी। 

मेरा अन्त:स्पन्दन
आनन्दमग्न नव-सर्जन।

भावों का सतंरगी सेतु
अनिर्वच आल्हाद हेतु। 
 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें