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वर्ष: 3, अंक 45, सितम्बर(द्वितीय) , 2018



सख्त निवेदन


रश्मि सिंह


                          
काश की मैं तुमसे बातें कर पाती
और कर पाती तुमसे एक सख्त निवेदन
कहती तुमसे
हटा दो वो दिन
फार फेंको उस महीने को
अपने कैलेंडर से
जो बस तकलीफ़ बन कर 
याद आया करते है
और कहती 
उसदिन को 
इतनी खूबसूरती से सजा कर पेश करना 
की हर वो काटें बदन को चुभते हुए
फूलो के छुअन का एहसास करवा जाएं।
तुम मान लो मेरा ये
सख्त निवेदन
न माने तो दूँगी तुम्हें
धमकी भरा एक पत्र जिसमें
लिखा होगा 
हर उस चुभन का एहसास
जिसे पढ़ कर तुम्हें 
महसूस होगा क्यों 
नही माना तुमने मेरे ये सख्त निवेदन।।
 

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