Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 45, सितम्बर(द्वितीय) , 2018



14 सितंबर (हिंदी दिवस) पर विशेष:
5 कविताएँ


पवनेश ठकुराठी ‘पवन‘


                           	 	
 
1. हिंदी हमारी माँ है
हिंदी हृदय हिंदी स्वर-लय हिंदी हमारी जाँ है हिंदी हमारी माँ है। हिंदी जीवन हिंदी तन-मन हिंदी हमारी जाँ है हिंदी हमारी माँ है।
2. हिंदी आराध्या भाषा है
अरबों का सपना है यह कुछ जन की नहीं अभिलाषा है हिंदी आराध्या भाषा है। हिंदी में है रामचरित हिंदी में कामायनी हिंदी में है ज्ञान अनौखा हिंदी में है रागनी यह एकता की दिग्दर्शक यह अंधियारे में पथप्रदर्शक सारे जग की आशा है यह कुछ जन की नहीं जिज्ञासा है हिंदी आराध्या भाषा है।
3. मैं हिंदी प्यारी हूँ
तोड़ो नहीं, मोड़ो नहीं, छोड़ो नहीं मुझे अपना लो, मैं तुम्हारी हूँ। फेंको मत, बिखेरो मत मुझे संभालो, मैं हिंदी प्यारी हूँ। डरो नहीं, आओ मेरे पास आओ मैं सभी से न्यारी हूँ। मैं हिंदी प्यारी हूँ
4. हिंदी पढ़ो, हिंदी लिखो
निज भाषा को अपनाओ निज भाषा पर ही गर्व करो हिंदी पढ़ो, हिंदी लिखो हिंदी पर ही गर्व करो। हिंदी को अपनाने में ना कोई संकोच करो हिंदी में पठन-पाठन तुम ओ संगी रोज करो। हिंदी में साहित्य अनौखा हिंदी में विज्ञान भी है तुम्हारी हर शंका का प्रिय हिंदी में समाधान भी है। हिंदी दाता, हिंदी माता हिंदी हमारा है संसार परभाषा को त्याग प्यारे इससे सजाओ निज परिवार।
5. हिंदी के लिए
धूप लिखूंगा, छाँव लिखूंगा शहर लिखूंगा, गाँव लिखूंगा हिंदी के लिए। प्रात लिखूंगा, रात लिखूंगा सुनी-अनसुनी बात लिखूंगा हिंदी के लिए। प्रीत लिखूंगा, रीत लिखूंगा बारूदों के गीत लिखूंगा हिंदी के लिए।

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें