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वर्ष: 3, अंक 45, सितम्बर(द्वितीय) , 2018



प्रेम


महेन्द्र देवांगन माटी


 
प्रेम करुं मैं प्रेम करुं , मानवता से प्रेम करुं ।
ऊँच नीच और जाति पाँति का , भेदभाव नहीं सहूं ।
प्रेम करुं मैं प्रेम करुं ।

हर गरीब को दाना मिले,  भूखे को खाना मिले ।
नहीं रहे कोई लाचार,  सबके मन में फूल खिले ।
आपस का झगड़ा छोड़े , सबके मन में प्रेम भरुं ।
प्रेम करुं मैं प्रेम करुं .....................

मर्यादा में सब रहें , नारी का सम्मान करें ।
न हो अपमान माता पिता का, उनका हम ध्यान रखें ।
नफरत की लाठी छोड़कर,  सबके ह्रदय सम्मान भरुं ।
प्रेम करुं मैं प्रेम करुं  , मानवता से प्रेम करुं ।


 	  

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