Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 45, सितम्बर(द्वितीय) , 2018



तनहाइयाँ


आशीष वैरागी


 
गर मुमकिन हो

तो लौट कर लग जाओ 

सीने से आकर

मेरी तन्हाइयां इस बात की 

गवाह है

कि तुम्हारे बाद मैं 

किसी और को

उतना चाह नही पाया	 
 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें