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वर्ष: 3, अंक 44, सितम्बर(प्रथम) , 2018



आ ये ले ना


हर्ष कुमार सेठ


                         
आ ये ले ना 
जो ख्वाब पूरे नही हुए उनके साथ 
कुछ देर तो सो ले ना 
उम्मीद कर जिन्दगी से 
जिन्दगी के ख्वाबों को 
उम्मीद में डूबो ले ना 
आ ये ले ना 

तेरे हंसने से दूनियां तो बदल जाएंगी नहीं 
पर कर उम्मीद उससे कोई जो आँसू 
अपने पोंछ ले ना 
आ ये ले ना 

दिल तेरा तुझ को ही दिखाई देता है 
ख्वाब को दिल से टकरा के आँसू पोंछ ले ना 
आ ये ले ना 

ख्वाबो कि दुनिया में जिन्हे ये मिल जाते है 
पर इक दिन ख्वाबों में ना जाने कहाँ चले जाते हैं 
चला जाता है आदमी सिर्फ ख्वाब रह जाते हैं 
बस ख्वाब बच गए हैं तू रख ले ना 
आ ये ले ना
 

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