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वर्ष: 3, अंक 44, सितम्बर(प्रथम) , 2018



आँख में आँसू भरना खूब आता है।


डॉ० अनिल चड्डा


 
उन्हें शिकायत करना खूब आता है,
आँख में आँसू भरना खूब आता है।

हवा-हवाई हुये जवानी के सपने अब,
हमें समय बिताना खूब आता है।

वो सुने न सुने अब दिल की दास्तां,
हमें खुद को सुनाना खूब आता है।

दिन में नींद, रातों को जगना हो,
नींद में भी लिखना खूब आता है। 
 

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