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वर्ष: 3, अंक 44, सितम्बर(प्रथम) , 2018



राष्ट्र निर्माता है शिक्षक
संदर्भ :- 5 सितम्बर(शिक्षक दिवस)


-राजेश कुमार शर्मा"पुरोहित"


डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस को हम प्रतिवर्ष शिक्षक दिवस के रूप में मनाते हैं।हमारे जीवन,समाज एवम देश के प्रति कर्मनिष्ठ शिक्षकों को 5 सितम्बर के दिन शिक्षक दिवस पर सम्मानित भी किया जाता है। यह समारोह पंचायत स्तर,ब्लॉक स्तर, जिला स्तर,मण्डल स्तर, राज्य स्तर व राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षकों को प्रदान किये जाते हैं।

डॉ. राधाकृष्णन भारत के पूर्व राष्ट्रपति थे। शिक्षा के प्रति पूर्ण समर्पित थे। राजनीति में प्रवीण थे। 1962 में कुछ छात्र 5 सितम्बर को उनके जन्म दिन को मनाने उनके पास गए। उन्होंने निवेदन किया। राधाकृष्णन बोले आप सब मेरा जन्म दिन मनाने के बजाय क्यों नहीं इस दिन को अध्यापन के प्रति मेरे समर्पण के लिए शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाय। उनके कहते ही उसी 5 सितम्बर 1962 से हम 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस मनाते हैं।शिक्षक ही देश के निर्माता कहे जाते हैं। देश का भविष्य बनाते हैं शिक्षक। आज देश का भविष्य विद्यार्थियों से बनता है जिन्हें शिक्षित कौन करता है शिक्षक।

शिक्षक मात्र पुस्तकीय ज्ञान ही नहीं देते अपितु हमारे व्यक्तितत्व का सर्वांगीण विकास करते हैं। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करते हैं। हमारे विश्वास व कौशल के स्तर का उन्नयन करते हैं।

भिन्न भिन्न विषयों के ज्ञान में हमें पारंगत करते हैं।शिक्षकों की भी कई व्यक्तिगत समस्याएं होती है फिर भी वह अपने कर्तव्यों का अक्षरशः पालन करते हैं। अतः वर्ष भर में एक बार उनका सम्मान होना भी चाहिए।

डॉ. राधाकृष्णन का जन्म 5 सितम्बर 1888 को हुआ था।उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दर्शनशास्त्र के शिक्षक के रूप में की। उन्होंने चेन्नई कोलकोता काशी मैसूर आदि विश्विद्यालयों के साथ ही लंदन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में जाकर दर्शन शास्त्र पढ़ाया। 1949 में इंजन विश्वविद्यालय का अध्यक्ष बनाया गया। डॉ. राधाकृष्णन ने कहा था " हमें अपने शिक्षक का सम्मान करना चाहिए क्योंकि बिना शिक्षक के हम सब इस दुनिया मे अधूरे हैं।शिक्षक देश के भविष्य के वास्तविक आकृतिकार है।हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं शिक्षक।

डॉ. राधाकृष्णन एक विद्वान ब्राह्मण थे। परिवार से बहुत गरीब थे। इन्हें बचपन से ही ज्यादा सुख सुविधाएं नहीं मिली।इन्होंने 16 वर्ष की उम्र में शादी की थी।भारतीय क्रिकेट टीन के महान खिलाड़ी लक्ष्मण इन्हीं के परिवार से ताल्लुक रखते हैं।आप बनारस विश्वविधालय में कुलपति रहे। इस दौरान आपने विपुल साहित्य दर्शन शास्त्र पर लिखा। विवेकानन्द व सावरकर आपके आदर्श रहे। देश की कला व संस्कृति से हमेशा प्रभावित रहे।

1947 से 1949 तक ये संविधान निर्मात्री सभा के सदस्य रहे। 13 मई 1962 को भारत के राष्ट्रपति बने। उस समय भारत चीन के बीच युद्ध हुआ। ऐसे समय मे इन्होंने देश की बागडोर अच्छे से संभाली थी।

1954 में इन्हें भारत रत्न,1962 में शिक्षक दिवस की घोषणा की 1962 में ब्रिटिश एकेडमी मेम्बर बने,गोल्डन स्पर से सम्मानित, ऑर्डर ऑफ मेरिट सम्मान इंग्लैंड से मिला।

इनकी प्रमुख कृतियां दर्शन व धर्म पर आधारित हैं गौतम बुद्ध जीवन और दर्शन,धर्म और समाज,भारत और विश्व।

1975 में टेम्पलटन पुरस्कार अमेरिकी सरकार ने मरणोपरांत प्रदान किया था। धर्म के क्षेत्र में ये पुरस्कार दिया जाता है।

जीवन मे चालीस वर्षों तक एक आदर्श शिक्षक रहे। शिक्षा के क्षेत्र में इनका अविस्मरणीय योगदान रहा। उनका कहना था"हमें मानवता को उन नैतिक जड़ों तक वापस ले जाना चाहिए जहाँ से अनुशासन व स्वतंत्रता दोनों का उदगम हो।"विद्यार्थियों को संबोधित करते वे कहते थे"पुस्तक पढ़ना हमें एकांत में विचार करने की आदत और सच्ची खुशी देता है। इसलिए प्रतिदिन स्वाध्याय करना चाहिए।


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