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वर्ष: 3, अंक 44, सितम्बर(प्रथम) , 2018



चारा


रवि सूदन


बाजार से गुजर रहा था, देखा एक व्यक्ति पक्षियों को खिलाने वाला दाना खरीद रहा था। देखकर दिल खुश हो गया। कहां तो किसी व्यक्ति को किसी के बारे सोचने की फुर्सत नहीं और कहां ऐसे नेकदिल इंसान जो पक्षियों के लिए भी सोचते हैं। सोचा, चलो इसका पीछा करता हूं जब यह पक्षियों को चारा खिलाएगा देखकर प्रसन्नता होगी। मैं स्कूटर पर और वह व्यक्ति भी स्कूटर पर चल पड़ा । एक बगीचे जैसी जगह पर वह व्यक्ति पहुंचा और अपने थैले से कुछ चीजें निकालीं। बड़े ढंग से उसने सारी चीजें जमा दीं और खुद कुछ दूर खड़ा हो गया। कुछ पक्षी आए, डरते डरते इधर उधर देखा, और दाना खाने आगे बढे। अरे यह क्या ? वो तो जाल में फंस गए। मन उदास हो गया। वापस घर आ गया।

कुछ दिन बाद एक पहाड़ी रास्ते से दूसरे शहर जा रहा था। एक मोड़ पर देखा, लोग कारें रोककर बंदरों को फल केले संतरे इत्यादि फेंक रहे थे। बंदर बड़े चाव से खा रहे थे। मुझे लगा, देखो इंसानियत पूरी तरह से मरी नहीं। बंदरों का पेट भी भर रहा है लोग मनोरंजन के साथ साथ पुण्य भी कमा रहे हैं।

मेरी खुशी अधिक समय तक न टिक सकी। एक और व्यक्ति कार से वहां आया। उसने कार से कुछ केले उठाए और कार की डिग्गी के नीचे टायरों के बीच फेंक दिए। एक छोटा सा बंदर का बच्चा आया। डरते-डरते केले का गुच्छा उठाने को हाथ बढ़ाया। लोग खड़े सेल्फी ले रहे थे। तभी उसका हाथ केले के गुच्छे में लगे कांटें में फंस गया। केले का गुच्छा एक रस्सी से बंधा हुआ था। वह व्यक्ति दौड़ कर आया और बंदर के बच्चे को पकड़कर कार में बंद करके ले जाने लगा। सभी बंदरों ने खूब शोर मचाया। पर वो कर भी क्या सकते थे? कार स्टार्ट कर वो व्यक्ति चलता बना। मेरा मन भी उदास हो गया। चलते-चलते नदी के किनारे पहुंचा। एक व्यक्ति बैठा कांटें में चारा फंसा रहा था। उसने पानी में कांटा फेंका और इंतज़ार करने लगा कि कब मछली फंसे। पक्षियों, जानवरों के चारे का रहस्य समझ में आ गया था।

घर आकर अखबार पढ़ने लगा। समाचार में आया था ‘एक मंत्री जी जानवरों का चारा खाने के मामले में जेल भेजे गए’

कुछ दिन बाद एक मैदान के पास से गुजर रहा था । चुनाव आ गए थे । बड़ी भीड़ थी लोग खूब तालियां बजा रहे थे। नेता जी मंच से भाषण दे रहे थे। ”चुनाव जीत कर मैं यहां सड़कें बनवा दूंगा, आपके बच्चों के लिए स्कूल खुलवा दूंगा। यहां की गरीब कन्याओं के विवाह की जिम्मेदारी मेरी होगी। किसी को कोई दहेज नहीं देना पड़ेगा।’ और भी बहुत कुछ उन्होंने जनता से कहा। जनता तालियों पर तालियां बजा रही थी। नए प्रकार का चारा देखकर मुझे हंसी आ गई।


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