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वर्ष: 3, अंक 44, सितम्बर(प्रथम) , 2018



आजादी


राजकुमार सिंह


 
बचपन बीता
गई जवानी
आया बुढ़ापा आजादी का
सत्तर वर्ष की अवधि में
पग-पग चलते डग-मग
पड़े फोड़े फटे बेवाई
जाग उठा जवान
करो स्वागत आजादी का
अन्न की जुगत में लगा किसान
सीमा की रखवाली करे जवान
मस्त चाल से सीना ठोके
महफूज रखना आजादी का
आतंक और प्रदूषण से
बीमार पड़ी है पूरी व्यवस्था
मरन्नासन हैं जीने की उम्मीदें
ढूंढो-ढूंढ़ो प्राण वायु
लड़खड़ाता सपना आजादी का
 

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