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वर्ष: 3, अंक 44, सितम्बर(प्रथम) , 2018



चमकता सूरज था अटल


कवि राजेश पुरोहित


 
आजीवन ब्रह्मचारी तपस्वी देश का था अटल।
सियासत का एक  चमकता सूरज था अटल।।

जिसने दुनिया को राजनीति का पाठ सिखाया।
अपने ओजस्वी भाषण से दिल जीतता था अटल।।

चौड़ी- चौड़ी सड़कों का जिसने जाल बिछाया था।
दूरदर्शी ईमानदार जनता का लोकप्रिय था अटल।।

कभी रुका नहीं कभी झुका नहीं किसी के सामने।
स्वाभिमानी,धीर ,वीर , गंभीर  तेजपुंज था अटल।।
 
इक्यावन कविताओं में जिसने भाव लिख डाला।
वरिष्ठ कवि,साहित्यकार बड़ा अनुभवी था अटल।।

संयुक्त राष्ट्र संघ में जिसने हिन्दी का परचम लहराया।
सच्चे हिंदी सेवक बनकर  फर्ज निभाता था अटल।।

मौत से अंतिम समय तक जो महावीर लड़ता रहा।
प्यार परायों का पाकर सर्वदा खुश होता था अटल।।		 
 

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