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वर्ष: 3, अंक 44, सितम्बर(प्रथम) , 2018



किशन कन्हैया


प्रिया देवांगन "प्रियू"


     
किशन कन्हैया मुरली बजैया , सब के मन को भाये ।
गोपियों  संग घूम घूम के,  दही और मक्खन खाये।
रास रचैया किशन कन्हैया,  सबको बहुत नचाये । 
सब लोगों के दिलों में बसे , सबको खुश कर जाये ।
मुरली की आवाज सुनाकर, मन को शांत कराये ।
गायों के संग घूम घूम कर , ग्वाला वह कहलाये।
गोपियो को छेड़े कन्हैया , सबको खूब तरसाये।
नटखट कन्हैया बंशी बजैया , माखनचोर कलहाये ।
सब कष्टो को दूर करे वह , संकट हरण कहलाये ।
राधा के संग नाचे कन्हैया  , संग में रास रचाये ।
कदम्ब  पेड़ पर बैठ  कन्हैया , मुरली मधुर बजाये
खेल खेल मे किशन कन्हैया  , राक्षसो को मार गिराये ।
लोगों के रक्षा खातिर , गोवर्धन को उठाये ।
इन्द्र देव के कोप से,  सबका जीवन बचाये ।
 

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