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वर्ष: 3, अंक 44, सितम्बर(प्रथम) , 2018



गौ महत्व


लवनीत मिश्रा


                          
गौ चाप सुनकर धरा,
लगाए युग अनुमान,
सतयुग त्रेता द्वापर मे,
धेनु का ऊंचा स्थान, 
कलयुग के आरंभ मे,
चाप ध्वनि मलिन,
कंपित धरा सुन तभी,
मन ही मन हो क्षीण, 
कलयुग के मध्यांतर में, 
गौ का नही सम्मान, 
अंत युग का जान लो,
जब गौ का हो अपमान, 
कलयुग के अंत तक धरा,
धेनु रिक्त हो जाए,
उस क्षण उस घडी,
प्रलय निकट आ जाए।

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