Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 44, सितम्बर(प्रथम) , 2018



स्वतंत्रता दिवस के नाम


डा. गोरख प्रसाद मस्ताना


                         
रोटी, नमक
प्याज लिख देना
बढता हुआ 
ब्याज लिख देना
टूटी लटकी
छप्पर छानी
चूल्हा चौकी
पानी पानी
रोते दृग सी
चूए पलानी
दीनों की है
यही कहानी
चहुंदिश तमस
राज लिख देना
चिथडों सम ही
फटाभाग्य है
साँसें क्या
बेसुरा राग हैं
टूटी सडकें
लगते सपने
गैरौं जैसे
सारे अपने
सडा घाव
'आज'. लिख देना
फटे दूधसी
हँसी अधर की
बे पानी है
नियत नजर की
भ्रम वितरण की
सदा सोचते
गिद्ध बने
आबरु नोचते
वे हैं झपट
बाज लिख देना।
 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें