Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 44, सितम्बर(प्रथम) , 2018



अहम् ब्रह्मास्मि


गंगाशरण शर्मा


                         
मैं विजेता हूं-
इसलिए नहीं कि
 मैंने जीत ली है
कोई प्रतिस्पर्द्धा
विषम परिस्थियों में 
सीख ली है मैंने 
जीवन जीने की कला!
मैं विजात हूं-
इसलिए नहीं  कि 
मैंने छोड़ दिया अ-‘हम’
मन के तल में
खोज लिया eआनंद स्रोतf
विकसित कर लिया तंत्र
परतंत्रता से मुक्ति का!  
मैं विजेता हूं-
इसलिए नहीं  कि 
मैंने समेट ली है
स्वयं में सारी 
वर्चस्वता ‘औ’आजादी
दर्पयुक्त ‘वह’ मैं ही हूं
अर्थात अहं ब्रह्मास्मि
		 
 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें