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वर्ष: 3, अंक 44, सितम्बर(प्रथम) , 2018



गुरु वंदना


गंगा धर शर्मा 'हिन्दुस्तान'


      
शिक्षा-धन ऐसा धन है, जो करें खर्च तो बढ़ जाता.
देने वाला ही इस धन का, उस्ताद, गुरु, शिक्षक कहलाता.
उस शिक्षक को नमन करें हम श्रद्धा पुष्प चढ़ाएँ.
गुरु चरणों की धूलि को मस्तक से आज लगाएँ.
संगीत, व्याकरण, कला, गणित, विज्ञानं तथा इतिहास.
सब कुछ सीखा जिनसे हमने, पाया ज्ञान प्रकाश.
सुसंस्कार जीवन में जिनके इंगित भर से आता.
संदीपन, वशिष्ठ , द्रोण सम वो शिक्षक कहलाता.
पढ़ा लिखा कर जो हमको दुनिया का ज्ञान करायें.
उस शिक्षक को नमन करें हम श्रद्धा पुष्प चढ़ाएँ. 
गुरु चरणों की धूलि को ....................
शिक्षा के मंदिर विद्यालय में ये जीवन्त देव प्रतिमाएं हैं
पाताल, व्योम और भूमंडल नित जिनको शीश झुकाए हैं.
बालक जब स्कूल में आता, कोरा कागज होता है.
वो अबोध कहलाता है सचमुच अबोध ही होता है.
अक्षर-अक्षर कर इनका जो जीवन ग्रंथ सजाएं.
उस शिक्षक को नमन करें हम श्रद्धा पुष्प चढ़ाएं.
गुरु चरणों की धूलि को ........................

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