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वर्ष: 3, अंक 44, सितम्बर(प्रथम) , 2018



युग पुरुष


डॉ दिग्विजय कुमार शर्मा 'द्रोण'


      
देश का एक महान योद्धा सो गया,
युगपुरुष वो महानायक खो गया।

जो सभी को साथ लेकर चलता रहा,
चमकता सितारा वो अस्त हो गया।

हिंदी कविता से मन की बात कहता रहा,
देश हित के लिए हुंकार वो भरता रहा।

हर दिल अजीज का वो संवाहक बना,
कैसी वेला में एक अंतराल सा हो गया।

न शिकायत किसी से न शिकवा गिला ,
वह जो हमेशा ही देश हित के लिए जिया।

कितने भी संकटों के पहाड़ों से टकराता रहा,
हर चुनौतियों को उसने सहज स्वीकार किया।

सबके दिलों पर वो राज बस करता रहा
जीवन के पथ पर एक कारवां बनता गया।

जब जब देश में स्वतन्त्रता दिवस आएगा,
तू यादें बन सबके दिलों में उतर जाएगा।

आदर्श व्यक्तित्व का सदा पैगाम देता रहा,
अमरगाथा बन जीवन से वो विदा ले गया।

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