Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 44, सितम्बर(प्रथम) , 2018



देवलोक का क्या करना


डॉ बसुन्धरा उपाध्याय


   
यह लोक अगर मिल जाये 
तो देवलोक का क्या करना
इस जन्म भूमि भारत माँ की
मन रे!सदा वन्दना करना
मेरा रोम रोम नतमस्तक है
हिमालय भी जिसका रक्षक है
गंगा की पावन धारा भी
करती इसका प्रक्षालन है
जहां गाय को माता कहकर 
पूजा जाता है घर घर में
माँ का सा उसे सम्मान मिले
वह बसी हुई हर धङकन में
ऐसे अखण्ड इस भारत में
नित दीप जले आशाओं  के
हम रहे न रहें फिर क्या चिंता
चमन में फूल खिले खुशहाली के
 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें