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वर्ष: 3, अंक 44, सितम्बर(प्रथम) , 2018



मसला तो ये है


आशीष वैरागी


 
मैं जानता हूँ 
तुम मुझे याद करती हो
तुम पर कुछ लम्हे है
जो केवल मेरे हैं
थोड़ी सांस तुममें है
थोड़ी साँसे मुझमें हैं

मुश्किल नही है
बीता वक्त याद करना
मुश्किल ये भी नही 
तुम मुझे पुकार लो
लेकिन मसला ये की 
तुम मुझे याद करती हो

और मैं,
मैं तो कुछ भूला ही नही
आशीष बैरागी
 

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