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वर्ष: 3, अंक 44, सितम्बर(प्रथम) , 2018



क्यों तक़ाज़ा कर गये


शुचि भवि


    
आपसे ही  है जब उल्फ़त क्यों तक़ाज़ा कर गये
प्यार शायद आपसे हद से ज़ियादा कर गये
                                                                                  
आप थे सबसे अलग ये बात मालुम है हमें
झूठ कहने का कहें फिर क्यों ये  वादा कर गये  
                                                                                      
अब तलक नादान हैं हम उम्र आधी हो गयी
पूरा करने जो मिले थे हमको आधा कर गये
                                                                                             
रंग तेरे में रंगी राधा को रंग भायेगा क्या
कान्हा लेकिन भूलकर राधा को सादा कर गये

बैठना थककर कभी देखो हमें आता नहीं
'भवि' मुसीबत में भी मंज़िल का इरादा कर गये
 

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