Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 44, सितम्बर(प्रथम) , 2018



दुखाया आज तुमने बहुत दिल


शुचि भवि


    
अगर राधा नहीं आये तो कहना
भुलाये गर वो कान्हा को तो कहना

किनारे पर जो होगा रेत का घर
न लहरों को रिझाये वो तो  कहना

दुखाया आज तुमने बहुत दिल  जो
कभी  तुमको वो  ठुकराए  तो  कहना

हो मुश्किल में अगर जां तो कभी दिल
ख़ुशी के गीत भी  गाये तो कहना

इनायत ही ख़ुदा की 'भवि'  रही है
अलावा तेरे वो भाये तो कहना
 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें