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वर्ष: 3, अंक 44, सितम्बर(प्रथम) , 2018



दोहे रमेश के रक्षा बंधन पर


रमेश शर्मा


    
बहना का तो प्यार है,    भाई का विश्वास !
राखी की इस डोर में,रिश्तों का अहसास !!

उत्साहित है हर नगर ,शहर गली बाजार !
रक्षा बंधन का पुनित, ...आया है त्यौहार !!

राखी का त्योहार है,,,सजने लगी दुकान ! 
हर बहना के हाथ में,  दिखता है मिष्ठान !!

फीका फीका सा लगे, राखी का त्यौहार ! 
जी अस टी के साथ मे,आया जो इस बार!!

कन्या भ्रूण का कोख में, करते है सँहार !
खतरे में लगने लगा,बहनों का त्यौहार !!

हो जाता है कोख में, कन्या भ्रूण सँहार !
कैसे होगी भावना,  राखी की साकार !!

कन्याओं के साथ में, ..किया हुआ खिलवाड़ ! 
दुनिया को ही एक दिन ,देगा सकल उजाड़ !!

बेटे को इज्जत मिले,. बेटी को दुत्कार !
रक्षाबंधन का वहां,रहा नहीं फिर सार !!

रिश्तों के इतिहास मे, शोभित है भूगोल !
भ्राता भगिनी नेह के,,ये बंधन अनमोल !!

रिश्ता मीठा इस तरह,ज्यों मिश्री का घोल ! 
बहन भ्रात के बीच का,ये बंधन अनमोल ! !

रहे हमेशा बीच मे,हम दोनो के प्यार !
राखी मेरी भ्रात ये, कर लेना स्वीकार !!

जीवन मे होना नही,कभी आप नाराज ! 
भाई मेरो नेह की,   रख लेना ये लाज  !!

भ्रात - बहन के बीच मे,रहे हमेशा प्यार ! 
दर्शाता है ये हमें, ......राखी का त्यौहार !!
 

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