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वर्ष: 3, अंक 44, सितम्बर(प्रथम) , 2018



सावन


धर्मेन्द्र अरोड़ा


   
(1)
मोहक सावन कर रहा, बरखा की बौछार! भूलो सारी नफरतें, दिल में भर लो प्यार!!
(2)
सावन का मौसम सदा, होता बड़ा हसीन! लगती है इस मास में, कुदरत भी रंगीन!!
(3)
सावन में आते यहां, कितने ही त्योहार! झूमें सब नर नारियां, सजता है संसार!!
(4)
भाईचारा सब रखो, सावन दे संदेश! कितना फिर सुंदर लगे, मेरा भारत देश!!
(5)
मिलजुल कर सारे रहो, मत करना तकरार! सावन में होती सदा, खुशियों की भरमार!!
(6)
जीवन जो हमको मिला, ईश्वर की सौगात! आया सावन मास है, लिए मधुर हर बात!!
(7)
मनवा जाए डोलता, नाचे हर इंसान! सावन में कांवर करे, भोले का गुणगान!!

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