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वर्ष: 3, अंक 44, सितम्बर(प्रथम) , 2018



रक्षाबंधन


सुरेश सौरभ


    
भाई बहन का प्रेम अमर
रक्षाबंधन दरसाता है
भाई न रूठे बहन से
यह हमें सिखाता है।
रूचना रोली से बहनें
भाई का भाल सजातीं हैं
बॉध कलाई में डोरी
मुंह मीठा करातीं हैं।
बहनें भाई से पैसे पाकर
आशीषें दें मुस्कातीं हैं।
 

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