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वर्ष: 3, अंक 44, सितम्बर(प्रथम) , 2018



खुशहाली ले बरखा आई


डॉ.प्रमोद सोनवानी पुष्प


 
   
खुशहाली ले बरखा आई ।
जहाँ-तहाँ हरियाली छाई ।।

अजी लबा-लब , ताल-तलैया ।
डुबकी खूब लगाएं भैया ।।

मेंढक मामा टर्र-टर्र करके ।
नाच रहे हैं ता-ता थैया ।।

जब से बरखा रानी आई ।
मस्त पवन है पुरवैया ।।
	 

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