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वर्ष: 3, अंक 44, सितम्बर(प्रथम) , 2018



मेरे प्यारे मुबाइल भैया


पवनेश ठकुराठी ‘पवन’


 
मेरे प्यारे मुबाइल भैया
पार लगा दो मेरी नैया।
होमवर्क मैंने नहीं पूरा किया
मस्ती में पूरा लम्हा जिया
कभी पतंग उड़ाई, कभी की लड़ाई
कभी सड़क में अपनी, साइकिल दौड़ाई
अब थककर निंदिया में चूर हो गया हूं
सपने देखने को मजबूर हो गया हूं
मेरे प्यारे मुबाइल भैया
पार लगा दो  मेरी नैया।
मास्टर जी को जाकर संदेशा दे दो
एक दिन की मेरे लिए छुट्टी ले दो
कह दो पप्पू के, पेट में है दर्द
खाना­पीना कुछ नहीं, माहौल है सर्द
लेटा है बिस्तर पर, होके निढाल
दरद के मारे, बुरा है हाल
मेरे प्यारे मुबाइल भैया
पार लगा दो मेरी नैया। 
	 

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