Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 44, सितम्बर(प्रथम) , 2018



मां मुझे देवभूमि घुमाओ!


पवनेश ठकुराठी ‘पवन’


 
टीवी, कंप्यूटर से अब उकता गया हूं
मैं तो नन्हा परिंदा बया हूं
घूमुंगा, फिरूंगा, मस्ती करूंगा
पहाड़ों में धप­धप चलूंगा
अब तुम ही मुझे हिमाल दिखाओ
मां मुझे देवभूमि घुमाओ!!
छल­छल छलकते छीड़ प्यारे
घुघुती, न्यौली के नीड़ सारे
कांव­कांव करती कौवौ की टोलियां
भेड़, भालू, हिरन की बोलियां
खित­खित हंसते बुरूशी के फूल
गैया के पैरों से उड़ती धूल
मां मुझे हरे खेतों में नचाओ
मां मुझे देवभूमि घुमाओ!!
भट्ट की चुड़कानी, मडुवे की रोटी
साया, सिंगल, बटुकी छोटी
केले, अंगूर, नारंगी प्यारे
खुमानी, पुलम, नाशपती न्यारे
मां मुुझे हिंसालू, किरमोड़ी, काफल खिलाओ
मां मुझे देवभूमि घुमाओ!!
गंगोत्री, यमुनोत्री, बद्री, केदार
अलका, औली, बेटुली की धार
फुलदेई, खतडु़वा, हरेला का त्यार
आमा, बूबू, जेड़जा का प्यार
मां मुझे कमीज, सुराव पहनाओ
मां मुझे देवभूमि घुमाओ!!
राजुला, जीतू, गंगनाथ की गाथा
कफू, कालू, कैतुरा का नाता
झोड़ा, चांचरी, तांदी से गीत
ऋतुरैण, भिटौली, बिखौती की रीत
मां मुझे बिणाई के सुर सुनाओ
मां मुझे देवभूमि घुमाओ!!
गोलू देवा, मेरी नंदा मैया
वहीं रहते हैं मेरे चंदा भैया
गाड़ी मंगाओ या जहाज ले आओ
जल्दी कोई उपाय सुझाओ
मुझे जिया, तीलू, गौरा से मिलाओ
मां मुझे देवभूमि घुमाओ!!
	 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें