Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 46, अक्टूबर(प्रथम) , 2018



देश की स्वच्छता


रवि सूदन


स्कूल के प्रधानाचार्य जी से मिलने स्कूल गया था । गेट के पास एक बेंच पर एक चपरासी बैठा था । उसे नमस्ते की और पूछा भाई साहब प्रिंसिपल महोदय आ गए क्या ? इतनी आत्मीयता से बात करते देख वह प्रसन्न हो गया चेहरे पर एक मुस्कान आ गयी । अभी आने में कुछ देर है उनके ऑफिस के बाहर इंतज़ार कीजिये ।

मुझे भी कोई जल्दी नहीं थी । समय व्यतीत करने के लिए उससे पूछा आप कितने समय से यहां काम कर रहे है ? यही कोई बीस साल से, उसने जवाब दिया । यदि आप कहें तो क्या मैं भी यहीं बैठकर प्रिंसिपल साहब का इंतज़ार कर लूँ मैनें पूछा ? हाँ हाँ क्यों नहीं, आइये बैठिये, एक ओर सरकते हुए उसने मेरे बैठने की जगह बना दी ।

हमारी बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ । वह ज़िन्दगी के थपेड़े खा खा के बड़ा हुआ लगता था, बातों बातों में उसने बताया की उसने बेटे को बड़ी आस से पढ़ाया थाकी पढ़ लिखकर कोई अच्छी सी नौकरी लग जायेगी तो जीवन को सफल समझेगा । परन्तु कई साल नौकरी के लिए धक्के खाने के बाद अब वह एक ठेले मेंसब्जियां बेचता है । बात करते करते उसने पास रखे थैले में से मूंगफली निकाली और मुझसे पूछा आप लोगे क्या ? मेरे ना कहने पर खुद ही छील छील कर खानेलगा और छिलके वहीँ फेकने लगा । मैंने कहा भाई साहब आज देश में सब लोग स्वच्छता के बारे कितने जागरूक हो गए हैं, देश में कितनी सफाई नजर आती है और आप इस प्रकार सड़क पर गन्दगी फैला रहे हैं ।

मेरी बात सुनकर उसका चेहरा तमतमा गया । स्वच्छता ? देश में स्वच्छता ? काहे की स्वच्छता साहब इतना पढ़ा लिखा तो नहीं हूँ पर आपको बता दूँ, देश में इतनी गन्दगी कभी नहीं फ़ैली जितनी अभी फ़ैल गयी है ।

क्या कह रहे हैं आप ? बरबस मेरे मुंह से निकला । हाँ साहब ठीक कह रहा हूँ । सड़क की गन्दगी तो ऊपर ऊपर की गन्दगी है जब चाहे साफ़ कर सकते है, पर यह देश में जो सवर्णो, दलितों, मुस्लिम- हिन्दुओं, के बीच गन्दगी फैल गयी है यह इतनी आसानी से साफ़ नहीं होने वाली । ऊपर की गन्दगी तो सहन की जा सकती है पर यह जो भीतर तक इंसान को गन्दा कर दिया गया है उसकी सफाई कौन करेगा ? मेरा मूंगफली खाकर सड़क गन्दी करना तो आपको अच्छा नहीं लगा पर यह जो लोगों के मन गंदे कर रहे हैं उन्हें क्यों नहीं मना करते ?

मैं चुपचाप उठकर प्रिंसिपल के ऑफिस की ओर चल दिया, उससे और सवाल जवाब करने की मुझमें हिम्मत नहीं थी ।


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें