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वर्ष: 3, अंक 46, अक्टूबर(प्रथम) , 2018



रिश्ता


राजीव कुमार


सुनसान चैराहे पर चिलचिलाती धूप में अचानक बहुत सालों के बाद परमेश्वर की दृष्टि अपने बेटे पर टिक गई।

परमेश्वर का मन-मस्तिष्क सुखद कामना में लीन हो गया और उसके बेटे का मन-मस्तिष्क अनसुलझे प्रश्नों से ग्रसित हो गया।

परमेश्वर को याद आया कि कैसे रधिया ने अपने पति को माफ कर दिया और अपनी सौतन को अपना लिया।

परमेश्वर के बेटे ने भी कहानी लोगों की जुबानी सुन रखी थी। पड़ोस की रधिया चाची के इस फैसले को कुछ लोग अच्छा कह रहे थे और कुछ लोग खराब।

परमेश्वर और उनका बेटा सोच की दुनिया से बाहर आए। परमेश्वर का बेटा भी मंद-मंद मुस्काया और परमेश्वर भी मंद-मंद मुस्काए।

परमेश्वर को लगने लगा कि सब कुछ अच्छा हो जाएगा। उसका बेटा भी माफी भरी नजरों से देख रहा था।

परमेश्वर को नजरअंदाज कर उसका बेटा कन्नी काटकर निकल गया, रिश्ते की परवाह नहीं की क्योंकि उसको एक और रिश्ता याद आ गया और याद आ गया अपनी मां का और उस पर हुए बुरे और अमानवीय अत्याचार का। उसको याद आ गया कि कैसे उसके बाप ने नई शादी करते ही, मुझको और मां को बरसात की काली रात में बेघर किया था।


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