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वर्ष: 3, अंक 46, अक्टूबर(प्रथम) , 2018



योग क्रांति का शंखनाद


कवि राजेश पुरोहित


  
योग जीवन में जिसने अपनाया।
उसने स्वस्थ तन और मन पाया।।

योग से धन और समय   बचाएं।
व्यर्थ दवाओं से  भी बच जाए।।

योग परमात्मा की ओर ले जाता।
असीम शांति और सुखी बनाता।।

घर घर जा ,  योग सिखाओ भाई।
नवपीढ़ी को भी ,  जगाओ भाई।।

योग क्रांति का,  शंखनाद हो गया।
भारत का , नव निर्माण हो गया।।

योग गुरुओं की,  मेहनत रंग लाई।
सबने देखो  योग क्रिया अपनाई।।

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें