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वर्ष: 3, अंक 46, अक्टूबर(प्रथम) , 2018



भोला ह्रदय


कुंदन कुमार


  
है ये हृदय बड़ा भोला रानी 
सीख न पाया छल बेमानी 
मुखड़ा ये मूरख की कहानी 
छोड़ सका न कोई जग में निशानी 
है ये  हृदय बड़ा भोला रानी 

न स्वाद चखा जो कभी प्रेम का 
अस्पर्श स्नेह तृष्णा था निशा का 
पूर्ण दिवस वो ज्वलन पावक का 
दूर दुस्तर में विलुप्त जवानी 
है ये  हृदय बड़ा भोला रानी 

जीवन सूखा यूँ बैशाखी क्षिति 
हर एक बून्द को प्यास तन सृष्टि 
आश ब्योम से हो प्रीत की वृष्टि 
जस तू लाई वारिद की रवानी 
है ये  हृदय बड़ा भोला रानी 

मुग्ध हो गये भूल जमाना 
तृप्त हुए कर मधुपान वीराना 
दामन की वात में दिखा ठिकाना 
शीघ्र समर्पित की जिंदगानी 
है ये ह्रदय बड़ा भोला रानी 

निर्मल मन वैराग्य समेटे 
ज्ञानी मन भी ख्वाब लपेटे 
इस पावन दिल में  तुम ही बसते 
मधुर बात सुन तेरे जुवानी 
है ये  हृदय बड़ा भोला रानी 

यंकी न नश्वर प्यार तुम्हारा 
जी न सको गर मैं न निहारा 
निकट स्वतः कहीं मैं जो पुकारा 
इस खातिर करता रहा मनमानी 
है ये  हृदय बड़ा भोला रानी 

चाह तुम्हे धरोहर भौतिकता 
इंसान वो जो निधि खातिर लड़ता 
चिर धरा भले खून रौंदता 
ये भाव कभी मैंने न ठानी 
है ये  हृदय बड़ा भोला रानी 

इरादा की मुझसे भी दौलत हो 
चलूँ विधु सा जग विकलित हो 
त्याग दया भले मन कल्पित हो 
शप्त ह्रदय न मैंने जानी 
है ये हृदय बड़ा भोला रानी 

उड़ने की चाहत हमें न कभी 
चहुंओर ख़ुशी पुलकित हूँ अभी 
लूँ समेत सृष्टि पर मुस्कान सभी 
मस्त बहे कस्ती संग पानी 
है ये  हृदय बड़ा भोला रानी 

छोड़ दूँ कैसे छटा मनोरम 
मंद पवन लहरों का विचलन 
तरुशिखा जो कंपित गाये सरगम 
है जहाँ समक्ष तेरे अनजानी 
है ये  हृदय बड़ा भोला रानी 

हो न सका वास्तव का मानव 
विमुख तू मुझसे मैं जो सास्वत 
क्रुद्ध हुई था मुझमें न नव 
कार्य मेरा था सब ही पुरानी 
है ये  हृदय बड़ा भोला रानी 

मधु पे ही मैं मरता केवल 
तुझे चाहिए हेम रत्न बल 
बीत सके मेरे संग न तेरा पल 
इस खातिर ढूंढा ताम्र शैलानी 
है ये  हृदय बड़ा भोला रानी 

आश न अब सावन की फुहार 
हर दिशा ब्याप्त जीवन की गुहार 
नीर बून्द बिना मरू का संसार 
बंजर ये धरा है तेरी नादानी 
है ये  हृदय बड़ा भोला रानी 

पर मरू में भी है मयंक चांदनी 
मंदित न उडु की कहीं रोशनी 
रवि ज्योति सदा है गए रागनी 
हुई नींद में रजनी मुझपे दीवानी 
है ये  हृदय बड़ा भोला रानी।
 

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