Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 46, अक्टूबर(प्रथम) , 2018



तो क्या बात थी !


कमला घटाऔरा


  
ऐ मेरे देश के लाल ! अगर
जीवन तुमने यूँ न गँवाया होता
नशों से मेल न बनाया होता ,
तो क्या बात थी !

माँ बाप का दिल
ऐसे न दुखाया होता
जीवन है देश की धरोहर
देश हित लगाया होता ,
तो क्या बात थी !

माँ के दूध का अमृत
कैसे तेरी रगों से उतर गया
जहर में ही सुख जीने का
कौन तुझे सिखा गया?
उस पिता का क्या होगा
जिसने तेरे कंधों पर जाना था
क्यों छीन लिया हक उसका ?
उसके सपनों को कर चूर चूर 
खुद को खुदी से दूर कर 
वक्त  पूर्व न विदा हुआ होता ,
तो क्या बात थी !

जीवन से प्यार करना
काश ! माँ से सीखा होता
माँ के त्याग तप को जाना होता
पिता के श्रम को आँखों से
कभी ओझल न किया होता
तेरी जवानी माता पिता का
भविष्य सँवारती चाहे ना ,
तूने अपना तो संवारा होता ,
तो क्या बात थी !

नशों ने कर दिया तुझे झर झर
जिस देश में तेरा जीवन पला
ग्रहण कर अन्न ,जल और हवा
उस देश से मिली नेमतों का ही
तुमने यदि आदर किया होता ,
तो क्या बात थी !
 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें

bppandey20@gmail.com