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वर्ष: 3, अंक 46, अक्टूबर(प्रथम) , 2018



जीवन के रंग


गरिमा


  
जीवन अंतहीन है,
बाढ हो, या हो अकाल
जीवन चलता रहता है,
केरल की बाढ में भी
लिया शिशुओं ने जन्म,
जन्म मरण का बंधन
होता नहीं आसान है,
कोई विपदा आये
सब खड़े हैं हिम्मत तान के,
सब डूबा है पानी में
चाहे हो वृक्ष या रेल की पटरी,
जिन्दगी थम सी गई हो 
जिन शिशुओं का हुआ है जन्म,
कितने हिम्मती होंगे वो
केरल की त्रासदी है बहुत बड़ी,
जिनके सहयोग में सारी जनता खड़ी,
प्रकृति करती है विनाशलीला
होगा कब विनाश खत्म
जब तक होगा पेड़ पौधों का अभाव
तब तक न रूकेगी विनाश की बात
पेड़ पौधे लगाने है
केरल जैसे हालात सुधारने है
 

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