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वर्ष: 3, अंक 46, अक्टूबर(प्रथम) , 2018



परेशानी


डॉ दिग्विजय कुमार शर्मा 'द्रोण'


  
परेशानियां जब भी आती हैं
किसी से कह कर नही आती।
बोल,बता कर, न सगुन, न दस्तक,
देकर नही, बस अचानक से आती है ।
अचानक ही आकर कमर तोड़ जाती है
परेशानी साथ में दो चार और लेकर आती है ।
एक सच घटना बीती हुई बताता हूँ,
मुशीबत की बीती व्यथा, कथा सुनाता हूँ ।
अचानक रात में स्त्री के बगल पेट  में 
एकसाथ जोर से दर्द उठा क्योँ मालूम नही,
वह जोर जोर से दर्द के मारे कराहे जा रही थी।
अब सहा नही जाता जल्दी डाक्टर को बुलाओ,
रात में डॉक्टर नही मिला हॉस्पिटल झटसे ले गया
डाक्टर में इंजेक्शन दिया थोड़ी सी राहत आई,
बॉडी के सारे चेकप कराए खून खींचा तीन बार
मरीज दर्द से कमजोरी से होता रहा परेशान।
लेकिन किसी को दया नही आई, 
कैसे डाक्टर और कैसा यहां इलाज है भाई
फिर एक्सरा, अल्ट्रासाउंड कराया। 
निकली अपेंडिक्स उपर से सूजन 
कहा अपेंडिक्स का तुरन्त ऑपरेशन कराओ 
मरीज ठीक करने का और कोई चारा नही है।
मरीज घबराया , उसको बहुत डरा दिया ।
आनन फानन में एडमिट किया ।
जैसे तैसे पैसों का किया तत्काल इंतजाम 
पूछा क्या हुआ भाई जान। 
बोला भैया निकल गई मेरी जान ,
क्या बताऊँ मेरा मरीज बड़ा परेशान।
जान बचवना है तो ऑपरेशन अंतिम इलाज, 
दवा दी सीधा ओ टी स्ट्रेचर पर लेजाया गया।
कर दिया पूर्ण बेहोश चलाये धारदार हथियार
फिर दनादन औजार चलाये  किया दूरबीन से
आपरेशन काट पीट  नस निकाल बाहर किया ।
तीन दिन तक मरीज रहा गैर  बेहोश ।
होश में आया तो लगा मेरा मरीज बच गया,
पर पैसा बहुत लग गया, ऐसी परेशानी आई।
जान में जान आयी परेशानी ने खूब धूम मचाई।
भैया हो गई सभी तरह से तन मन धन की बर्बादी। 
यही है परेशानी जो बिन बताए है जब आ जाती।

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