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वर्ष: 3, अंक 46, अक्टूबर(प्रथम) , 2018



बरखा रानी
( सार छंद )


महेन्द्र देवांगन माटी


 
झूम रहे सब पौधे देखो , आई बरखा रानी ।
मौसम लगते बड़े सुहाने , गिरे झमाझम पानी ।।1।।

हरी भरी धरती को देखो , हरियाली है छाई ।
बाग बगीचे दिखते सुंदर,  मस्ती सब में  आई ।।2।।

कलकल करती नदियाँ बहती  , झरने शोर मचाये ।
मोर नाचते वन में देखो , कोयल गाना गाये ।।3।।

बादल गरजे बिजली चमके , घटा घोर है छाई ।
सौंधी सौंधी माटी महके , बूंद पड़े जब भाई ।।4।।

खेत खार में झूम झूम कर , फसलें सब लहराये ।
हैं किसान को खुशी यहाँ पर ,  "माटी" गीत सुनाये ।।5।।		 
 

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