Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 48, नवम्बर(प्रथम) , 2018



*ऋषयो मंत्र द्रष्टारः*
सूर घनाक्षरी
८८८६


राज वीर सिंह


    
ऋषि-मुनि दे गए हैं 
  मंत्र जो अभी नए हैं 
    जीवन  बनाने  वाले 
               पद उच्चारिए ।। 


ऋक् यजु: सामवेद 
   अथर्व से न हो खेद 
      ज्ञान विज्ञान पाकर
               सम्मान पाइए ।। 


करते  नकल  हम 
   शंकर जी बम बम 
      भूल परमाणु  बम 
              नहीं  बनाइए ।। 


राज   में  सब  वीर  हों 
   न ही  अब  अधीर   हों 
      ऋषियों की रीति-नीति 
                      आ अपनाइए ।।
 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें