Sahityasudha view
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
मुखपृष्ठ


साहित्यकारों की रचना स्थली

वर्ष: 3, अंक 48, नवम्बर(प्रथम) , 2018



तंग क्यों आ गए हो


डॉ० अनिल चड्डा


 
मेरी छेड़खानी से, तंग क्यों आ गए हो,
इश्क- बयानी से, तंग क्यों आ गए हो।

बहुत परेशान करती है कच्ची उम्र तुमको,
अपनी जवानी से, तंग क्यों आ गए हो।

सजा देदी उम्र भर की, बिन खता के,
ऐसी नादानी से, तंग क्यों आ गये हो।

जो हमको थे कहा करते, वही तो हमने बोला है,
खुद अपनी कहानी से, तंग क्यों आ गये हो।

अनिल की दास्तां ऐसी, जो सुनता वो ही हंस देता,
इस आदत पुरानी से, तंग क्यों आ गये हो।
		 
 

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें