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वर्ष: 3, अंक 48, नवम्बर(प्रथम) , 2018



सहमा हुआ हर शख्स है


पीताम्बर दास सराफ "रंक"


    
बदला हुआ परिदृश्य  है
सहमा हुआ हर शख्स है।।१।।

किसने चुना जनप्रतिनिधि
किसने कहा सब सभ्य हैं।।२।।

यह देख इस पर ख़ून है
उसको चुना,यह भ्रष्ट है।।३।।

हर तरह देख लिया इन्हें
बदस्तूर ये एक कब्ज़ हैं।।४।।

मिन्नत नहीं , कर थू "रंक"
इनके लिये बद लफ्ज़ है।।५।।
 

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