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वर्ष: 3, अंक 48, नवम्बर(प्रथम) , 2018



अपने-अपने फर्ज निभायें


नरेंद्र श्रीवास्तव


    
ऐसा भी कुछ कर दिखलायें।
अपने - अपने फर्ज निभायें।।

इक-दूजे से रखें मोहब्बत।
इक-दूजे का मान बढ़ायें।।

आपस में मतभेद मिटाकर।
आपस में सामंजस्य बनायें।।

अपराधों में अंकुश आ जाये।
' स्वजन ' में संस्कार जगायें।।

लड़ने,अड़ने की जिद छोड़ें।
'बड़ों' की कही बात निभायें।।

मिलजुल कर के रहें शांति से।
स्वस्थ-सुखी माहौल बनायें।।
 

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