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वर्ष: 3, अंक 48, नवम्बर(प्रथम) , 2018



समय


नवीन कुमार भट्ट


    
1.
समय ज्ञान की साधना,लेना इसे सहेज। इसके आगे ना टिके,लाखों मिला दहेज।।
2.
कुदरत का वरदान है,मोती से अनमोल। जानें इसकी अहमियत,मत कर टाल मटोल।।
3.
समय समय पे कीजिए,अपने सारे काम। जो समझे ये खेल है,भुगत रहा अंजाम।।
4.
परिभाषा इसकी बड़ी,कभी न होगा अंत। होकर रहता है सदा,जिसका जहाँ लिखंत।
5.
त्रेता द्वापर की करो,या सतयुग की बात। हर युग का छाया बना,समय सदा ही भ्रात।।
6.
समय जीत की नीव है,मत कह देना हार। करे साधना जो अगर,मिल जाये उपहार।।

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