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वर्ष: 3, अंक 48, नवम्बर(प्रथम) , 2018



फिर दोषी है कौन ?
( दशहरे के दिन हुये हादसे पर कुछ दोहे )


कमला घटाऔरा


  
1.
त्योहार हो गये आज , विपद के प्रतिरूप । छीने खुशियों की छाँव , देके तीखी धूप ।।
2.
सत्यमेव जयते पर्व ,आता है हर साल गाँव गावँ से देखने ,जुटते बाल अबाल ।।
3.
धू धू कर जला रावण, उड़ने लगे अँगार । धुआँ धुंध सा छा गया , होके दैत्याकार ।।
4.
जलते ही रावण संग ,फैली चीख पुकार । उत्सव मातम में ढला , जाते ही सरकार ।।
5.
इधर जलता रावण था , उधर बुझे चिराग लेके जान आयोजक ,गये कार में भाग
6.
किस कारण हुआ ऐसा , सब धारे हैं मौन । यदि सब निर्दोष बनते , फिर दोषी है कौन ?
7.
जीवन की कद्र करना ,भूले क्योंकर लोग । जन्म दाता के आँगन , देकर जाते सोग ।।

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