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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 61, मई(द्वितीय), 2019

लड़की की बस यही कहानी है

रोली मिश्रा

लड़की को कभी किसी ने अपना न समझा. वो रही हमेशा बेगानी है.. सदियों से एक ही किस्मत पायी उसने लड़की की बस यही कहानी है।। कोई ठिकाना बना नही, मुसाफिर जैसी रहती हैं, सपना उसका कोई नही, दूसरे के सपनों को अपना कहती है लड़की खुद के असित्तव से आज भी अंजानी है, लड़की की बस यही कहानी है।। लड़की के आखिर क्यों सपने तोड़े जाते हैं, जहां उसने जन्म लिया, वो रास्ते क्यों छोड़े जाते हैं उसके पैदा होने से लोगो के मन क्यों घबराते हैं , फिर क्यों कोख में दी जाती उसकी र्कुबानी है, लड़की की बस यही कहानी हैं।।। 2


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