मुखपृष्ठ
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 61, मई(द्वितीय), 2019

'रचयिता' ( God)से !!

कविता गुप्ता

बेमिसाल, विशाल, अदभुत, आकर्षक सृष्टि , रचा कर भी 'तूँ', अभिमान से उछलता नही । कहाँ से लाया बुद्धि, सामर्थ्य, साजो सामान , अदृश्य ! ढूँढ़ते हारे, पूछने पर बोलता नही । हम से न सम्भलती, 'यह छोटी सी दुनिया' , आफरीन ! सारी कायनात, संभालता सही । क्या छोटे बड़े सहायक, तेरे मददगार होते ? देखने में खेल न्यारे, लगा कोई कमी न रही । कोई कनात न शामियाना फिर भी सुरक्षित , शुक्रिया सदा, तेरी अनन्त मेहरबानियाँ रहीं ।


कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें