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Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 61, मई(द्वितीय), 2019

मेरी जिंदगी

अजय अमिताभ सुमन

मेरे नाम में अचानक, ये क्या सूझी है तुझको? बदनाम मैं बड़ा हूँ, दे दूँ तुझे मैं कैसे? क्या है तेरा इरादा. मेरी जिंदगी से तुझको? अंजाम ईक बुरा हूँ, दे दूँ तुझे मैं कैसे? उलझनों का मेरे. जवाब नही कोई , तुझे चाहिए हिसाब , दे दूँ तुझे मैं कैसे? दिल रहा है शीशा मेरा, पत्थर ये दुनियाँ, तुम्हे चाहिए पर ख्वाब, दे दूँ तुझे मैं कैसे ? मेरा मेरे मन से , रही दुश्मनी हमेशा, तुम मांगते हो वादा, दे दूँ तुझे मैं कैसे? मेरे साथ ही रहने का, सही तो है इरादा, पर गम हैं थोड़ा ज्यादा, दे दूँ तुझे मैं कैसे? मंजिल न मेरी सीधी, ना मैं भी इतना सादा, मन भावनी सी सूरत , दे दूँ तुझे मैं कैसे? मरने में बड़ी बाधा, जीता हुँ आधा आधा, तुझे प्यार की जरूरत, दे दूँ तुझे में कैसे? शिद्दत से पड़े पीछे, बुरे वक्त के सौदागर, खराब है मुहूरत , दे दूँ तुझे मैं कैसे? मेरी जिंदगी का मुझको, कोई नहीं भरोसा, मेरी मौत पे हुकूमत, दे दूँ तुझे मैं कैसे?


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