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साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 61, मई(द्वितीय), 2019

चल मेरे घोडे

रामदयाल रोहज

चल मेरे घोङे तबङ तबङ हम बात करेंगे सूरज से क्यों इतना गर्मी में तपता क्या उसको चढ गया ज्वर चल मेरे घोङे तबङ तबङ चल मेरे घोङे तबङ तबङ हम बात करेंगे चन्दा से क्यों वह घटता बढता रहता किस जादू का हुआ असर चल मेरे घोङे तबङ तबङ चल मेरे घोङे तबङ तबङ हम बात करेंगे तारों से रजनीभर आँखें झपकाकर भोर हुई तब गये किधर चल मेरे घोङे तबङ तबङ चल मेरे घोङे तबङ तबङ हम बात करेंगे सागर से मछली को क्यों कैद करी क्या दोष लगाया इनके सिर चल मेरे घोङे तबङ तबङ चल मेरे घोङे तबङ तबङ हम बात करेंगे बादल से दिल में बिजली चोट करे फिर भी कैसे है घोर स्वर चल मेरे घोङे तबङ तबङ


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