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वर्ष: 2, अंक 33, मार्च(द्वितीय), 2018



कुएं से इतर


मोती प्रसाद साहू


कुछ लोग
नाम सुनकर
चेहरा देखकर
शब्द बुलवाकर
मालूम कर सकने में
माहिर होते हैं
किसी की जाति
उपजाति   
किसी का मजहब
किसी का प्रदेश  
और मन ही मन
ताड़ लेते हैं कि  
यह मेरे लिये
उपयुक्त है अथवा 
अनुपयुक्त  
सजातीय है अथवा
विजातीय  
विज्ञान की भाषा में 
घुलनशील है अथवा
अघुलनशील   
जब यह सिद्ध 
कर लेते हैं कि
यह मेरे कुएं से इतर
एक अजनबी प्राणी है
तो अपने चिर परिचित
कुएं में लगा लेते हैं 
एक छलांग
छपाक् !

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