साहित्यकारों की वेबपत्रिका
साहित्यकारों की वेबपत्रिका
Sahityasudha
वर्ष: 3, अंक 57, मार्च(द्वितीय), 2019

मेरी ख़ामोशी


चाँदनी सेठी कोचर


मेरी ख़ामोशी को मेरी कमजोरी ना समझो तुम,
खामोश हूँ, पर कमजोर नहीं !
तुम्हारे मान - सम्मान के लिए खामोश हूँ ,
वरना मैं जितना लिखना जानती हूँ !
उस से अधिक बोलना भी जाती हूँ !
मानती हूँ , मैं आज एक बेरोज़गार हूँ ,
पर हमेशा नहीं रहूँगी ,
मुझे विश्वास है , अपने - आप पर और
मेरी किस्मत पर !
मानती हूँ , खामोश हूँ ,
पर दिल में दर्द मेरे भी होता है !
कभी तो बोलने से पहले सोचो,
आखिर मैंने तुमसे माँगा ही क्या है !
मैं लिखती हूँ , इसमें मुझे ख़ुशी मिलती है !
तुम क्या जानो , मेरी ख़ुशी !
इसलिए तुम मेरी ख़ामोशी को
मेरी कमजोरी ना समझो ,
इससे दुनिया का महान बेवकूफ बनने में
तुम्हे वक़्त नहीं लगेगा !

कृपया रचनाकार को मेल भेज कर अपने विचारों से अवगत करायें